Friday, January 1, 2010

कैसे मिटेंगे फासले....

जीवन के सफऱ में, निभाऊँ कैसे तेरा साथ।
तुम रुक नहीं सकते,मैं चल नहीं सकता ।।

कैसे समझ सकोगे तुम, हाले-दिल़ मेरा ।
तुम़ पूछ नहीं सकते, मै कह़ नहीं सकता।।

अपनी है कहानी, कुछ ज़मीं-आसमाँ जैसी।
ये उठ नहीं सकती, वो झुक़ नहीं सकता ।।

कैसे मिटेंगे फास़ले,..गोपाल..अपने बीच।
तुम़ आ नहीं सकते, मैं जा नहीं सकता ।।

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