Wednesday, October 28, 2026

कैसा इंसान है?…………..

कैसा  इंसान  है ?  यूँ  शोर  न  कर ।

परिन्दे        हैं,          उड़      जएंगे ॥

मासूम,देख के कुछ दाने चले आए हैं।

पेट की आग बुझा लेंगे ,चले जाएँगे ॥


नहीं करना है इनको क़ब्ज़ा किसी के हक् पर।

किसी भी आँगन , चौबारे से , गुज़र जाएंगे ॥


वैसे भी तूने  कहाँ छोड़ा ,किसी का हिस्सा  ।

जो जाके और भी कहीं पे उतर जाएँगे॥


ज़मीनों-ज़र ,दरो- दरख़्त,  समन्दरो-आकाश।

सब तेरे हैं तो ये मज़लूम किधर जाएँगे?।


कुछ तो इंसानियत् का भरम बचा रहने दे।

वरना परिन्दे क्या,इंसान भी डर जाएँगे ॥

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